M.A (EDUCATION) Final Year | Special Education | विशिष्ट शिक्षा


M.A ( EDUCATION ) FINAL YEAR

Paper--Special Education (विशिष्ट शिक्षा )


1 👉 विशिष्ट शिक्षा (Special Education) से आशय है-
 ➡️ विशिष्ट बालकों के लिए की जाने वाली शैक्षिक व्यवस्था ।


2 👉 विशिष्ट बालक माना जाता है-
 ➡️ सामान्य से कम या अधिक योग्यता वाले बच्चे ।

 
3 👉 " जब हम किसी को 'विशिष्ट' कहकर वर्णित करते हैं, हम व्यक्ति को औसत या सामान्य लोगों , जिन्हें हम एक या इससे अधिक लक्षणों के सम्बन्ध में जानते हैं , से अलग रखते हैं ।" विशिष्ट बालक की यह परिभाषा दी है -
➡️ सचवार्ट्ज ने ।


4 👉 “विशिष्ट प्रकार या विशिष्ट शब्द किसी ऐसे लक्षण या उस लक्षण को रखने वाले व्यक्ति पर लागू किया जाता है, जबकि लक्षण को सामान्य रूप में रखने से व्यक्ति की सीमा इतनी अधिक होती है कि उसके कारण व्यक्ति या बालक अपने साथियों का विशिष्ट ध्यान प्राप्त करता है और इससे उसकी व्यवहार की अनुक्रियाएँ और क्रियाएँ प्रभावित होती हैं।" विशिष्ट बालक की यह व्यवस्थित परिभाषा दी है-
 ➡️ क्रो तथा क्रो ।


5 👉 बौद्धिक रूप से विशिष्ट बालक कितने प्रकार के होते हैं-
➡️ 4 .

6👉 बौद्धिक रूप से विशिष्ट बालक के  चार प्रकार  हैं 
➡️        (i) मानसिक रूप से पिछड़ा,                                   
            (ii) शैक्षिक रूप से पिछड़ा,                                                   
            (iii) प्रतिभावान्    
            (iv) सृजनात्मक।


7 👉  विशिष्ट शिक्षा के मुख्य उद्देश्य  हैं-
➡️    -1) बाधित बच्चों की विशेष आवश्यकताओं को ज्ञात करना, 
        -2 )उनकी समस्याओं की जानकारी प्राप्त करना तथा उनके समाधान के उपाय खोजना,
        -3) बाधित बच्चों के सर्वोत्तम पुनर्वासन की व्यवस्था करना ।


8 👉  विशिष्ट शिक्षा के प्रमुख सिद्धान्त-
 ➡️         -1) वातावरण का नियन्त्रित होना,                        
                2) विशिष्ट प्रक्रिया को अपनाना,  
                3) वैयक्तिक शिक्षा कार्यक्रम को अपनाना,           
                4) व्यक्तिगत-भिन्नता को ध्यान में रखना,
                5)माता-पिता के सहयोग को प्राप्त करना ।


9 👉 -विशिष्ट बालकों की शिक्षा की प्रक्रिया के मुख्य चरण एवं महत्त्वपूर्ण बातें हैं-
➡️   1) विशिष्ट बालकों की सही-सही पहचान करना तथा उनका समुचित आकलन करना,  
       2) शिक्षण में व्यक्तिगत भेदों पर अधिक बल देना, 
       3) विशिष्ट शिक्षण संस्थाओं की व्यवस्था करना, 
       4) समन्वित शिक्षा को लागू करना,    
       5) विशिष्ट अधिगम पर बल देना,  
       6)  भत्तों का प्रावधान करना,        
       7) विशिष्ट शिक्षकों की व्यवस्था करना तथा 
       8) विशिष्ट शिक्षा के लिए आवश्यक अतिरिक्त साधनों एवं उपकरणों की व्यवस्था करना।

10 👉  हम उस बालक को पिछड़ा बालक कहते हैं जो सामान्य से-
➡️  भिन्न स्तर का बालक है।


11 👉 पिछड़े बालक की मुख्य पहचान "पिछड़ा
हुआ बालक वह है जो शिक्षा सत्र के बीच में अपनी आयु स्तर की कक्षा से एक दर्जे नीचे का कार्य न कर सके।" यह पहचान दी है -
➡️ सिरिल बर्ट ने ।


12 👉 पिछड़े बालकों के मुख्य प्रकार हैं-

 ➡️   1) शारीरिक रूप से पिछड़े बालक,                                 
        2) मानसिक रूप से पिछड़े बालक,                              
        3) शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े बालक,                        
        4) भावनात्मक रूप से पिछड़े बालका ।


13 👉 बालकों में पिछड़ेपन के लिए जिम्मेदार मुख्य कारण हैं-
➡️ शरीर-सम्बन्धी कारण, मानसिक दोष, शैक्षिक रूप से पिछड़ जाना, संवेगात्मक कारण, वातावरण का दूषित
होना, विद्यालय का प्रतिकूल वातावरण ।


14 👉 यदि कोई बालक शारीरिक दोष के कारण पिछड़ गया है तो उसे सामान्य स्तर पर लाने के लिए जहाँ एक ओर उसके शारीरिक दोष को समाप्त किया जाना चाहिए, वहीं
दूसरी ओर -
➡️ कक्षा में उसे आगे की सीट पर बैठाना चाहिए तथा अध्यापक द्वारा उसका विशेष ध्यान रखना चाहिए।


15 👉 कुछ बालकों के पिछड़ेपन का मुख्य कारण आर्थिक होता है। ऐसे बालकों को सामान्य स्तर पर लाने के लिए उन्हें सुविधा प्रदान करनी चाहिए
 ➡️  1) इन बालकों की फीस माफ कर देनी चाहिए ,
       2) किसी अन्य कोष से यदि सम्भव हो सके तो कुछ अतिरिक्त सहायता भी करनी चाहिए , 
       3) शिक्षा के प्रति प्रेरित करना चाहिए।


16 👉 पिछड़े बालकों को सामान्य स्तर पर लाने के लिए शिक्षक को उनके प्रति सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार रखना चाहिए तथा उनके स्तर का एक-
 ➡️ लेखा-जोखा रखना चाहिए एवं उनकी प्रगति की समय-समय पर जांच करते रहना चाहिए।


17 👉 वे बालक , जो किसी शारीरिक या मानसिक रोग के कारण मन्द होते हैं और अपनी आयु- वर्ग के बालकों के समान कोई भी कार्य करने में असमर्थ होते हैं , कहलाते हैं-
 ➡️ मंद-बुद्धि बालक ।

18 👉 मंद बुद्धि बालकों की बुद्धि- लब्धि (I.Q.) कितना होता है-
 ➡️ 70 या उससे भी कम .

19 👉 मंद-बुद्धि बालकों के मुख्य प्रकार या वर्ग हैं -
➡️  1) मूर्ख बालक 
      2) अल्प बुद्धि बालक 
      3) असहाय बालक 
      4) सीमांत बालक ।        
                        
20 👉 मूर्ख बालक की बुद्धि- लब्धि होती है-
 ➡️ 20 से 25

21 👉 अल्प बुद्धि बालक की बुद्धि -लब्धि होती है -
➡️ 26 से 50 

22 👉 असहाय बालक की बुद्धि -लब्धि होती है -
➡️ 51 से 70

23 👉 सीमांत बालक की बुद्धि -लब्धि होती है -
➡️ 71 से 80
 
24 👉 मूर्ख बालक की पहचान है-
 ➡️ ये जीवन- पर्यंत कुछ भी नहीं सीख पाते ।

25 👉 अल्प बुद्धि बालक की पहचान है-
 ➡️ ये पढ़- लिख नहीं सकते तथा सामान्य रूप से स्वतंत्रतापूर्वक जीवन- यापन भी नहीं कर पाते ।

26 👉 असहाय बालक की पहचान है-
 ➡️ ये अत्यल्प ज्ञानार्जन कर पाते हैं तथा इन्हें कुछ हस्त कलाएं सिखाई जा सकती हैं ।

27 👉 सीमांत बालक की पहचान है-
 ➡️ इनका स्तर सामान्य बालकों से स्पष्ट रूप से निम्न ही रहता है ।

28 👉 शैक्षिक दृष्टिकोण से मन्द बालक को को दी जाने वाली मुख्य शैक्षिक सुविधाएं हैं 
➡️   1) व्यक्तिगत शिक्षण की सुविधा 
       2) करके सीखने की विधि द्वारा शिक्षण 
       3) योग्यता के अनुकूल पाठ्यक्रम का निर्धारण
       4) बालक की अधिगम तत्परता का ध्यान रखना
       5) बालक को पुनरावृत्ति तथा अभ्यास के लिए प्रेरित करना 
       6) कम कालांश के लिए शिक्षण अर्थात कम अवधि के लिए कोई विषय पढ़ाना ।


29 👉 मानसिक रूप से मन्द बालकों की शिक्षा व्यवस्था इस प्रकार होनी चाहिए -
➡️  1) विशिष्ट विद्यालयों की स्थापना 
      2) विशिष्ट  कक्षाओं का गठन 
      3) योग्य एवं प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति
      4)  अलग से पाठ्यक्रम का निर्धारण 
      5)  विशिष्ट शिक्षण विधियों को अपनाया जाना
      6)  हस्तकला की शिक्षा को प्रथमिकता ।


30 👉 अधिगम असमर्थी बालक (Learning disabled Children) से आशय है-
 ➡️ जो बालक सामान्य बातों को सामान्य विधियों द्वारा नहीं सीख पाते या सीखने में पर्याप्त कठिनाई अनुभव करते हैं ।


31 👉 अधिगम बाधिता (Learning disability) के मुख्य प्रकार हैं
 ➡️   i) पाठन-सम्बन्धी बाधिता (Reading Disability),
       ii) लेखन-सम्बन्धी बाधिता (Writing Disability),
      iii) योग्यता की समस्या (Problem in Numerical Ability) तथा
      iv) सम्प्रेषण में ग्राह्य-सम्बन्धी समस्या
(Problem in Comprehending Communication)


32 👉 मन्द अधिगामी बालकों की पहचान के मुख्य उपाय या विधियाँ हैं-
 ➡️ निरीक्षण प्रविधि, एकल अध्ययन विधि, डॉक्टरी परीक्षण, शैक्षिक परीक्षण, व्यक्तित्व-परीक्षण, बुद्धि-परीक्षण तथा मनोवैज्ञानिक परीक्षण।

33 👉 मन्द अधिगामी बालकों के सम्मुख उत्पन्न होने वाली मुख्य ज्ञानात्मक अधिगम समस्याएं हैं -
➡️    i) धीमी गति से सीखने की समस्या
       ii) पाठ्यवस्तु का शीघ्र याद ना होना
      iii) शैक्षिक स्तर का प्रायः निम्न ही बने रहना ।


34👉 मन्द अधिगामी बालकों के सम्मुख उत्पन्न होने वाली मुख्य भाषा एवं वाणी संबंधी समस्याएं हैं-
➡️   i) शाब्दिक अभिव्यक्ति में कठिनाई होना 
      ii) मौखिक अधिगम में कठिनाई होना
     iii) सामान्य शब्दों का उच्चारण सही ना कर सकना तथा           
     iv) विचारों की सही अभिव्यक्ति न कर पाना 

 
35 👉 मन्द अधिगामी बालकों के सम्मुख उत्पन्न होने वाली मुख्य सामाजिक एवं संवेगात्मक समस्याएं -
➡️   1) बालक अपने समूह या कक्षा में अधिक समय तक नहीं रह पाते 
       2) थकान या बेचैनी अनुभव करने लगते हैं 
       3)  मित्र नहीं बना पाते
       4)  आत्मविश्वास की कमी बनी रहती है 
       5)  दांतो से नाखून काटते रहते हैं 
       6)  समूह में रहना पसंद नहीं ।


36 👉 संवेगात्मक दृष्टिकोण से विक्षिप्त बालकों से आशय है-
➡️ व्यवहार सामान्य बालकों से अधिक भिन्न होता है तथा सामाजिक नियमों एवं मान्यताओं का उल्लंघन करते हैं ।


37 👉 संवेगात्मक रूप से विक्षिप्त बालकों की शिक्षा के लिए व्यवस्था होनी चाहिए-
➡️  1) विशिष्ट बाल विद्यालय स्थापित करना
      2) कक्षा कक्ष की अलग से अनुकूल व्यवस्था करना
      3)  उपयुक्त उपचार की व्यवस्था करना ।

38 👉 शारीरिक विकलांगता का आशय है-
➡️ शरीर के किसी अंग का सुचारु रूप से कार्य न करना ।

39 👉 विकलांग बच्चों के मुख्य प्रकार हैं-
➡️ अपंग बालक , संपूर्ण या अर्थ दृष्टिहीन बालक,  पूर्ण बधिर या अपूर्ण बधिर बालक , हकलाने वाले या दोषपूर्ण- वाणी वाले बालक तथा निर्मल या कोमल बालक ।


40 👉 अस्थि बाधित बालक उन बालकों को कहते हैं जिनकी किसी एक या अधिक-
➡️ अस्थियों , मांसपेशियों तथा जोड़ों  में किसी प्रकार से दोष आ जाता है ।


41 👉 जिस बालक के पास सुनने की क्षमता नहीं होती या समाप्त हो जाती है उसे कहा जाता है-
➡️श्रवण बाधित या बहरा बालक 


 42 👉 श्रवण बाधित बालकों की पहचान के लिए किए जाने वाले मुख्य परीक्षण हैं- 
➡️ विकासात्मक मापनी , मनोनाड़ी परीक्षण,  चिकित्सकीय परीक्षण,  एकल -अध्ययन तथा बालक के  व्यवहार का निरीक्षण  ।


43 👉श्रवण-बाधित बालकों की मुख्य शैक्षिक समस्याएं हैं-
➡️    1) बोलने की क्षमता का विकास न होना 
        2) भाषागत विकास ना हो पाना 
        3) अधिगम में कठिनाई तथा 
        4)  शैक्षिक उपलब्धियों में अत्यधिक न्यूनता का पाया जाना ।

44  👉 श्रवण -बाधित बालकों के शिक्षण के लिए किए जाने वाले उपयोगी उपाय हैं -
➡️   1) चिह्न भाषा को अपनाना 
       2) ओष्ठ- पठन का अभ्यास करना 
       3) संकेत भाषा को अपनाना 
       4) स्पर्श विधि तथा गति विधि को अपनाना तथा 
       5) ध्वनि प्रवर्धक यंत्रों का प्रयोग करना  ।

 45 👉 जो बालक सही ढंग से बोल नहीं पाते या बिल्कुल भी नहीं बोल पाते उन्हें कहा जाता है-
➡️ बालक-बाधित बालक ।

 46 👉वाणी दोष का अर्थ है -
➡️ वाणी का सामान्य ना होना ।

47 👉 मुख्य वाणी-दोष हैं-
➡️ तुतलाना , धीरे धीरे बोलना या निमियाना , नाक दबाकर बोलना तथा मोटी आवाज या कर्कशता ।

48 👉 वाणी- संबंधी दोषों के कारण हो सकते हैं-
➡️ शारीरिक या मनोवैज्ञानिक ।

49 👉 मनोवैज्ञानिक कारणों से विकसित वाणी-दोषों के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार होते हैं -
➡️ अभिभावक (guardian) .

50 👉जिन बालकों की दृश्य -क्षमता कम या बहुत कम होती है, उन बालकों को कहा जाता है-
➡️ दृष्टि बाधित बालक (visually handicapped children) .

51 👉 जो बालक बिल्कुल भी नहीं देख पाते, उन्हें रखा जाता है-
➡️अंधे बालक (blind child) की श्रेणी में । 

52 👉 अंधता के मुख्य प्रकार हैं-
➡️     1) जन्मजात अंधता 
         2) अर्जित अंधता अर्थात जन्म के उपरांत उत्पन्न होने वाली अंधता 
         3) पोषण की कमी के कारण उत्पन्न होने वाली अंधता
         4) उपचार के अभाव में उत्पन्न होने वाली अंधता ।
  

53 👉 दृष्टि बाधित बालकों के सम्मुख उत्पन्न होने वाली मुख्य समस्याएं हैं-
➡️ न्यून बुद्धि -लब्धि की समस्या, शैक्षिक समस्या ,भाषा का अपर्याप्त विकास ,व्यक्ति का सामान्य विकास न हो पाना तथा  सामाजिक समायोजन की समस्या ।

54 👉 अंधता से ग्रस्त बालकों की शिक्षा के लिए कौन सी प्रणाली को अपनाया जाता है -
➡️ ब्रेल ढंग या प्रणाली (braille system) .


55 👉 दृष्टि- बाधित बालकों की शिक्षा में किन बातों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है-
➡️    1)  अगले सीटों पर बैठाना
        2) कमरे में प्रकाश की समुचित व्यवस्था होना 
        3) शिक्षण सहायक सामग्री का प्रयोग करना
        4)  ब्लैक बोर्ड पर बड़े अक्षरों में लिखना ।

56 👉 प्रतिभासंपन्न बालक की बुद्धि-लब्धि होती है -
➡️ 120 से अधिक

 57 👉 प्रतिभा संपन्न बालकों की पहचान के लिए कुछ परीक्षण करने आवश्यक होते हैं इस प्रकार के मुख्य परीक्षण हैं-
➡️    1) बुद्धि परीक्षण 
        2) विशेष योग्यता परीक्षण 
        3)  वैयक्तिक वार्षिक बुद्धि परीक्षण 
        4) उपलब्धि परीक्षण 
        5) पिछली कक्षा में प्राप्त अंक
        6)  अध्यापक के मत ।


58 👉 कक्षा प्रबंधन (classroom management) से  आशय है-
➡️ शिक्षक या अध्यापक तथा छात्रों के आपसी संबंधों के माध्यम से अधिगम की प्रक्रिया का संपन्न होना ।


59 👉 कक्षा प्रबंधन के विषय में हरबर्ट के दृष्टिकोण के कितने पद हैं-
➡️  5 

60 👉 हरबर्ट के आयाम/पद इस प्रकार हैं -
➡️   1)  प्रस्तुतीकरण 
       2) तैयारी 
       3) तुलना 
       4) विश्लेषण एवं संश्लेषण तथा    
       5)  सामान्यीकरण ।

61 👉 कक्षा -प्रबंधन के विषय में मूल्यांकन दृष्टिकोण को प्रतिपादित करने का श्रेय किसको है -
➡️ बी. एस. ब्लूम को ।


62 👉 मूल्यांकन दृष्टिकोण के अनुसार शिक्षण की प्रक्रिया के 3 पद माने गए हैं जो इस प्रकार हैं -
➡️  1) शिक्षा के उद्देश्य 
      2) अधिगम अनुभव तथा
      3) व्यवहार- परिवर्तन ।

63 👉 कक्षा- शिक्षण एवं प्रबंधन की प्रक्रिया के मुख्य निर्धारक हैं -
➡️ कक्षा प्रबंधन की अवस्थाएं , शिक्षण- अधिगम के उद्देश्य , अधिगम की निरंतरता या अधिगम का प्रारूप तथा शिक्षण का संगठन ।

64 👉 विशिष्ट शिक्षा प्रदान करने वाले शिक्षक में जिन गुणों की आवश्यकता होती है उनमें से मुख्य गुण एवं कौशल हैं -
➡️   1) शिक्षण के मौलिक कौशल का पाया जाना 
       2)  कुशल कक्षा प्रबंधन 
       3)  व्यक्तिगत शिक्षण की योग्यता 
       4)  लक्ष्य निर्धारण का कौशल 
       5)  पाठ्यक्रम का अनुकूलन 
       6)  शिक्षण आव्यूहों का उचित उपयोग 
       7)   कक्षा के अनुकूल वातावरण को विकसित करना
       8)   उपलब्ध संसाधनों का सही प्रबंधन 
       9)   शिक्षण की प्रक्रिया का नियंत्रण एवं मूल्यांकन। 

 
65 👉 विशिष्ट शिक्षा के अध्यापकों को प्रशिक्षित करने का उद्देश्य यह है कि वे -
➡️ विशिष्ट बालकों की आवश्यकताओं को जान सकें तथा उन्हें शिक्षित करने की  विशेष प्रविधि सीख सकें ।

66 👉 ठाकुर हरि प्रसाद शोध एवं पुनर्वास-मानसिक विकलांग संस्थान (Thakur Hari Prasad Research and Rehabilitation Institute for Mentally Handicapped ) स्थित है-
➡️ हैदराबाद (Hyderabad)

67 👉 राष्ट्रीय दृष्टि-विकलांग संस्थान (National Institute for Visually Handicapped) स्थित है-
➡️ देहरादून (Dehradun) .

68 👉 अली यावर जंग राष्ट्रीय श्रवण-बाधित संस्थान (Ali Yovar Jung National Institute for the Hearing
Handicapped) स्थित है -
➡️ मुम्बई (Mumbai).

69 👉 राष्ट्रीय अस्थि बाधित संस्थान (National Institute for Orthopaedically Handicapped) स्थित है-
➡️कोलकाता (Kolkata).

70 👉  राष्ट्रीय पुनर्वास प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान
(National Institute of Rehabilitation Training Research) स्थित है-
➡️ ओलटूर (कटक) (Olature (Cuttak)).

71 🥱 भारतीय पुनर्वास परिषद्
(Rahabilitation Council of India) स्थित है-
➡️   ( a) मुम्बई 
       ( b) कोलकाता 
       ( C) नई दिल्ली   
       ( d) गाँधीनगर ।
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